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गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

जहाँ साथ रहे हों,जहाँ दोस्तों के मेले हों
हर सुबह संदील हो, हर शाम रंगीन हो
कुछ ऐसा ही था अपना यह स्पेशल घर
जहाँ गम की कोई ना बात हो,हमेशा खुशियों की सौगात हों
सोचता हूँ की एक ऐसा ही घर बनाऊं,अपने प्यारें दोस्तों को बुलाऊँ
फिर मिलकर झूमें गायें धूम मचाएं जस्न मनाएं...

12 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी ब्लाग जगत की इस सरस दुनिया में आपका स्वागत है...हर तरह के दबाव से मुक्त यह स्वतंत्र पर्यावरण आपकी कलम और आपकी सोच को पूरा पूरा मौका देगा कि यह लगातार ऊंचे से ऊंचे उड़ सकें....अन्य ब्लागों और उनके कलमकारों के साथ आपके मित्रता पूर्ण संबंध इसे और बल प्रदान करेंगे....सो अधिक से अधिक ब्लागों के अध्यन को अपनी अन्य अच्छी आदतों में शामिल करें और पढ़ी हुयी रचनायों पर टिप्पणी करना न भूलें...

    योगेश जी आपकी कलम के मोती वास्तव में आपकी लेखन साधना के आकाश पर चमक रहे सितारे भी हैं..

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. जय श्री कृष्ण ...आप हिंदी में लिखते हैं। अच्छा लगता है। मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं | हमारे ब्लॉग पर आपके विचारों का स्वागत हैं|

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  4. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  5. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  6. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,

    साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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  7. मेरे मित्रो समय की कमी के कारण सबसे पहले तो में माफी चाहूँगा की में आपके इतने सुंदर टिप्पड़ियों को देखकर मेरा मन बहुत प्रफुल्लित हुआ है में आप सभी का तहे दिल से शुक्र गुजार करता हूँ.
    आपका यह योगदान मेरी छवी को कवि की भूमिका में बदलने के लियें अत्यधिक आवश्यक है. आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप ऐसे ही प्रोत्साहन देते रहिएगा आपका सहयोग बहुत ही अनमोल है .....
    आपका अपना योगेश चन्द्र उप्रेती

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  8. एकदमसही कहा है.अपना घर होता ही ऐसा है....उसपर भी अगर अपने पुराने दोस्तों के साथ अच्छे पल बिताने को मिले तो फिर कहना ही क्या.समय की रफ़्तार को हम थाम तो नहीं सकते लेकिन साथ गुजरे अच्छे पलों को यद् करके खुश जरूर हो सकते हैं...बहुत सटीक लिखा है...आशा है ऐसे ही अच्छी रचनाएँ आप अपनी कलम से कलान्वित करते रहेंगे....

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  9. योगेश जी आपका ब्लोग कुछ हट कर लगा ….... मैं भी गुलजार जी फैन हूँ उनकी शायरी बेमिसाल है

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  10. आपकी टिपण्णी के लिए आपका आभार धन्यवाद सुमन'मीत'जी...
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप ऐसे ही प्रोत्साहन देते रहिएगा...

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