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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

ना जाने वो कब आएगी

 






  

ना जाने वो कब आएगी, 
साझ ढले सूरज तलें, या चाँद तारो तलें
सूरज की पहली किरण के संग, या नीलें अम्बर तलें
नदियों की लहरों संग, या मौसम के बदलते मिजाज के संग
कालें मेघो से बर्खा की तरह, पर्वतों से बर्फ की चादर ओड़े
हवाँ के झरोखों से, या कपकपाती  ठण्ड में धुंद्लें कोहरे के बीच
आसमान में बादलो से होकर,  या सुहावने मौसम के संग
मुझे इंतज़ार है उसका बेकरारी से, वो फिर मुझे अपनी ओर खीच रही है
एहसास दिलाते हुए की तू मुझसे मिल तो सही, मै ही तेरा भविष्यकाल हूँ
अभी मै तुम्हारा सपना हूँ, चंद लम्हात के बाद मै ही तुम्हारी हकीक़त हूँ
मेरा नाम है "बेला", आप सभी की अपनी "नव वर्ष की शुभ बेला"

नव वर्ष से पूर्व , नव वर्ष के इंतज़ार में
मेरा दिल  कहता है की वो कुछ ऐसे आएगी
आपके दिल की हर एक हसरत पूरी हो जायेगी
नव वर्ष की शुभ बेला नए तराने लेकर आएगी 

मै  आपकी अपनी "बेला" "नव वर्ष की शुभ बेला"
में जल्द आ रही हूँ . . .

लेखनी: योगेश चन्द्र उप्रेती

10 टिप्‍पणियां:

  1. नव वर्ष की शुभ बेला में आप को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  2. ...बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    आप को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ|

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  3. आदरणीय योगेश चन्द्र उप्रेती जी
    सादर प्रणाम
    आपको नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...स्वीकार करें ......आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा

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  4. केवल राम जी आपको भी नव वर्ष 2011 की बहुत बहुत शुभकामनायें.
    नव वर्ष मंगल मय हो

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  5. राहुल जी आपकी सुंदर सी टिप्पड़ी के लियें बहुत बहुत धन्यवाद . . .

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