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शनिवार, 3 जुलाई 2010

मनुष्य

परोपकार ही मान है, परोपकार ही सम्मान है
भक्ति की धारा है, प्रभु की सेवा है
अहा ! वही उदार है, परोपकार जो करें
वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरें...

परोपकार कोई धर्म नहीं, यही धर्मो का धर्म है, यही कर्म है
परोपकार से ही रिद्धि है, परोपकार से ही सिद्धि है
अहा ! वही सदाचारी है, परोपकार जो करें
वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरें...

परोपकार क्षमा है, परोपकार शत्रु का मित्र है
परोपकार शुभ कर्म है, परोपकार सज्जन्न्ता है
विराग ज्ञान ध्यान तप, विवेक धैर्य त्याग परोपकार ही है
अहा वही प्रेरणाश्रोत है, परोपकार जो करें
वही मनुष्य है जो मनुष्य के लियें मरें...

हर मनुष्य उपकार करें, एक दूसरे पे परोपकार करें यही मेरे जीवन का मूल सिद्धांत है। यही मेरे जीवन का आदर्श है।
लेखनी- योगेश चन्द्र उप्रेती

9 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहाँ आपने।

    ->सुप्रसिद्ध साहित्यकार और ब्लागर गिरीश पंकज जी का साक्षात्कार पढने के लिऐ यहाँ क्लिक करेँ

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  2. सच कहा है.जीवन में परोपकार से बढ़कर कोई भी बड़ा पुण्य और कोई धर्म नहीं है.तुम्हारी रचनाओं में ये दिल को छू लेने वाली बातें बहुत अच्छी लगती हैं.उम्मीद है आगे भी इसी तरह की सुन्दर रचनाओं के मोती अपनी कलम से बिखेरते रहोगे.

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  3. वो राहुल जी क्या है ना की हर इंसान की सोच का एक दायरा होता है अगर उस दायरे से निकल कर इस दुनिया की सोच के दरिया में ना डूब जाओ तब तक आप कुछ कर नहीं सकते . . . तो आओ मिलकर एक सुखी संसार की कल्पना करें . . . एक दुसरे का आदर करें यह कार्य किसी परोपकार से कम नहीं है . . . .

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