मेरी कलम के मोती

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शुक्रवार, 16 मई 2025

कोई समझता क्यों नहीं

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मेरी ख़ामोशियों को कोई, समझता क्यों नहीं दिल की हलचलों को कोई, समझता क्यों नहीं उम्र गुज़र रही हैँ मेरी, लोगों में खुशियां लुटा कर, पर मेरी मो...
रविवार, 14 जनवरी 2024

काश

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काश मुझे भी पीने की आदत होती,मैं कब का मुर्दा हो गया होता। छुटकारा मिलता आज के आतंकवाद से, किसी शमशान भूमि में सो गया होता। मेरा एतबार कौन...
मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

ये मेरे मैं होने का वजूद

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ये मेरे मैं होने का वजूद
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मैं (ये मेरे मै होने का वजूद)

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ये मेरे मै होने का वजूद यादें जहाँ है मैं उन यादों में हूँ बाते जहाँ है मै उन बातो में हूँ नीदें जहाँ है मै उन रातो में हू...
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मंगलवार, 22 मई 2018

पिताजी

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पिताजी पर बहुत कम कविताएं लिखी गई है । रचयिता को सलाम । देखते ही देखते पिताजी बूढ़े हो जाते हैं हर साल सर के बाल कम हो जाते हैं... बचे ब...
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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

नए साल की तुम्हें बधाई

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आई रे आई फिर वो नयी सुबह आई, नए साल की तुम्हें बधाई-२ कोई तो बुलाओं मुझे बेला अरि ओ बेला नव वर्ष की शुभ “बेला” लो मैं आई धीरे ...
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मंगलवार, 26 मार्च 2013

"छुट्टी अपनी तो आज ही होली है" होली है . . .

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आपको सपरिवार होली की रंग भरी शुभकामनायें . . . होली के दिन ये क्या ठिठोली है छुट्टी अपनी तो आज ही होली है लाल गुलाल सी लागे त...
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शनिवार, 10 नवंबर 2012

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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‎"दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं" झिलमिलाते दीपो की आभा से प्रकाशित , ये दीपावली आप सभी के घर में धन धान्य सुख समृद्धि और इश्वर ...
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शनिवार, 15 सितंबर 2012

याद "अक्सर याद आती है..."

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याद "अक्सर याद आती है ". . . हिंदी दिवस के अवसर पर मैंने सोचा की कुछ मेरी ओर से भी योगदान रहे तो अच्छा लगेगा जो मुझसे हो सका वो ...
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गुरुवार, 23 अगस्त 2012

मिलते रहेंगे

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“ मिलते रहेंगे ...” जिंदगी में जरुर मिलते रहेंगे, आप कैसे है ?  पूछते रहेंगे ... बात को बिगड़ने नहीं देंगे,  अगर बिगड़ी...
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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

आप सभी को मेरी तरफ से "नव वर्ष की शुभकानाएँ"

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इस वर्ष तन्हाई ने मेरे दिल में दस्तक ना दी, चारों तरफ खुशियों का एक समा सा रहा है बदौलत इसके मेरी कलम कुछ रुकसत सी हो गयी मुझसे,जैसे सारी तन...
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"नव वर्ष का जन्म दिन"

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नव वर्ष मंगल मय हो, नव वर्ष की हार्दिक बधाईयां, एक "जन्म दिन" ऐसा भी इस बार "नव वर्ष" का कुछ नए तरीके से आगमन करते है . ...
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बुधवार, 21 दिसंबर 2011

बीतें लम्हें

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वो देहरादून की छोटी छोटी बस्तिया, जहां रहती थी कुछ हम जैसी हस्तियाँ उनमें से थी एक पटेलनगर की बस्ती, जहा छाई थी हर तरफ मस्ती, वो चाहे हो च...
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

11 11 11 एक एक एक एक चिड़ियाँ अनेक चिड़ियाँ

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11 11 11 इस वर्ष का सबसे अदभुत दिन 11 11 11 . . . आओ इस दिन को एन्जॉय करें . . . आज एक एक मिलकर अनेक हो गए मेरे प्यारे मित्रो चलो आज हम ...
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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

दीपावली की शुभकामनायें

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दीपावली के शुभ आगमन पर मेरे समस्त मित्रवरो और ब्लोग्कर्ताओ एवं समस्त परिवारजनों को मेरी और से हार्दिक शुभकामनायें आपके जीवन में हर्षोउल्लास ...
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गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

क्रोध दुश्मनी का बीज . . .

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आज मेरी कलम क्रोध के काफी समीप पहुच चुकी थी। मुझे आकर के बोली कि चलो आज इसका अंत समय आया आओ देखें की क्रोध के बीज ने कैसा खेल रचाया। क्रोध ...
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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

नव वर्ष मंगल मय हो

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नव वर्ष मंगल मय हो आपको और आपके समस्त परिवार को नए साल के आगमन पर हार्दिक बधाईयाँ  Yogesh Chandra Upreti Software Engineer Alchemis...
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बुधवार, 29 दिसंबर 2010

ना जाने वो कब आएगी

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      ना जाने वो कब आएगी,  साझ ढले सूरज तलें, या चाँद तारो तलें सूरज की पहली किरण के संग, या नीलें अम्बर तलें नदियों की लहरों संग, य...
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बुधवार, 8 दिसंबर 2010

शायद ज़िन्दगी बदल रही है . . .

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मेरे मित्र आदित्य गुप्ता जी जिंदगी को कुछ यूँ बयान कर रहे है शायद आपको पसंद आएं. जब मैं छोटा था, शायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी.. मुझे...
मंगलवार, 14 सितंबर 2010

हिंदी दिवस पर विशेष "हिंद देश के निवासी सभी जन एक है ! रंग रूप वेश भाषा चाहे अनेक हैं !! "

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आज मेरा जन्मदिन हैं. और आज ही हिंदी दिवस भी... इस खुशी के पावन मौके पर में चुप ना रह सकूंगा.. केवल इतना ही कहूंगा... क्यों आज हिंदी भाषा प...
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रविवार, 15 अगस्त 2010

स्वतन्त्रता दिवस (भारत)

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|| आजादी के परवानो का सम्मान करो || सभी को स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाईयाँ ... सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दुस्तां हमारा हम बुलबले है उसकी...
गुरुवार, 22 जुलाई 2010

गम की बरसात

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एक कवि के आंसू बारिश की बूँदें बनकर के किस तरह बिखरती है मैंने इस कविता में देखा तो मुझसे रहा नहीं गया. आखिरकार मेरी कलम मजबूर हो गयी और एक...
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शनिवार, 3 जुलाई 2010

मनुष्य

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परोपकार ही मान है, परोपकार ही सम्मान है भक्ति की धारा है, प्रभु की सेवा है अहा ! वही उदार है, परोपकार जो करें वही मनुष्य है जो मनुष्य के ल...
9 टिप्‍पणियां:

परोपकार

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"परोपकार का अर्थ है दुसरो की भलाई करना।" ताने को बुनने की तरह, कलियों को चुनने की तरह, कुम्हार की माटी की तरह आज सार्थक प्रया...
16 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 28 जून 2010

एक नज़र इधर भी...

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भारत के लोगो बोलो यह आज कैसी घ ड़ी है, चले गए अंग्रेज मगर अंग्रेजी यही खड़ी है... सिसकती सी हिंदी जिनकी यह भाषा वही इसको भूले , कि हिंदी यह...
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बुधवार, 9 जून 2010

ॐ जय गूगल

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ॐ जय गूगल हरे ...... स्वामी जय गूगल हरे ..... प्रोग्रामर्स के संकट, देवेलोपेर्स के संकट, क्लिक मैं दूर करे!! ॐ जय गूगल हरे ......!!...
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शुक्रवार, 4 जून 2010

मैं लिखता हूँ

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मैं लिखता हूँ इसलिए कि मुझे कुछ कहना होता है. मैं लिखता हूँ इसलिए कि ताकि मैं कुछ कहने के काबिल हो सकूँ. मैं अफ़साना नहीं लिखता, हकीकत यह ह...
3 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

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जहाँ साथ रहे हों,जहाँ दोस्तों के मेले हों हर सुबह संदील हो, हर शाम रंगीन हो कुछ ऐसा ही था अपना यह स्पेशल घर जहाँ गम की कोई ना बात हो,हमेशा ख...
10 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 3 अप्रैल 2010

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"वक़्त" हर खुशी है लोगो के दामन में, लेकिन एक हसी के लिए वक़्त नहीं, माँ की लोरी का एहसास तो है, पर माँ को माँ कहने के लियें वक़्त...
2 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 26 मार्च 2010

हाय रे हाय दिल्ली की भीड़ा भाड़ी...

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दिल्ली की कहानी योगेश की जुबानी अगर दिल्ली के वाशिंदों को बुरा ना लगे ... परन्तु मेरी एक छोटी सी कविता जो कही न कहीं थोड़ी ही सही मगर दिल्ली ...
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अपने बारे में. . .

मेरी फ़ोटो
योगेश चन्द्र उप्रेती
अल्मोड़ा, उत्तरांखण्ड, भारत, India
ज़माने की भीड़ में जहा है हजारो लोग, मै वहाँ भी अपने आप को अकेला पाता हूँ , जिन्हें मिल चुकी उनकी मंजिल वो कितने खुशनसीब है, किन्तु वो क्या ढूंढे जिसकी कोई मंजिल नहीं सोच के चुप रह जाता हूँ आकांक्षा मेरी भी थी, रहूँ उम्रभर साथ उनके, परन्तु क्यों ना जाने लोग मुझसे दूर रहने लगे, और मेरे साथ रहे मेरे लिखे दो मीठे बोल, जिनसे घिरकर में अकेला रह जाता हूँ, यही सब सोचके में चुप रह जाता हूँ ...
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ज़माने की भीड़ में जहा है हजारो लोग, मै वहाँ भी अपने आप को अकेला पाता हूँ , जिन्हें मिल चुकी उनकी मंजिल वो कितने खुशनसीब है, किन्तु वो क्या ढूंढे जिसकी कोई मंजिल नहीं सोच के चुप रह जाता हूँ आकांक्षा मेरी भी थी, रहूँ उम्रभर साथ उनके, परन्तु क्यों ना जाने लोग मुझसे दूर रहने लगे, और मेरे साथ रहे मेरे लिखे दो मीठे बोल, जिनसे घिरकर में अकेला रह जाता हूँ, यही सब सोचके में चुप रह जाता हूँ ...
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